कोठरी के अंदर का तापमान अचानक शून्य से नीचे गिर गया। विक्रम का शरीर हवा में कुछ इंच ऊपर उठ गया। उसके काले बाल अब चांदी जैसे सफेद (silver-white) हो गए थे और हवा में लहरा रहे थे। उसकी आँखों में भावनाएं नहीं थीं, केवल एक दिव्य और ठंडापन था जो किसी इंसान का नहीं हो सकता था।
[ओरिजिन स्पिरिट गॉड बॉडी: सक्रिय]
[समय सीमा: 30 सेकंड]
"क्या... क्या हो रहा है?" सबसे आगे खड़े गार्ड ने हकलाते हुए कहा। उसे अपनी अंतरात्मा में एक गहरा डर महसूस हुआ, जैसे वह किसी शिकारी जानवर के सामने खड़ा हो।
"मारो इसे!" पीछे वाले गार्ड ने चिल्लाया।
पहला गार्ड आगे बढ़ा। उसने 'रॉक फिस्ट आर्ट' (Rock Fist Art) का इस्तेमाल किया। उसकी मुट्ठी पत्थर की तरह सख्त हो गई और उसने पूरी ताकत से विक्रम के चेहरे पर वार किया।
विक्रम अपनी जगह से नहीं हिला। उसने पलक तक नहीं झपकाई। उसने बस उस गार्ड की ओर देखा और कल्पना की।
'तुम्हारा वार मुझ तक नहीं पहुँच सकता। यह दूरी अनंत है।'
गार्ड की मुट्ठी विक्रम की नाक से सिर्फ एक इंच दूर थी, लेकिन चाहे उसने कितनी भी ताकत लगाई, वह उस एक इंच की दूरी को पार नहीं कर पाया। ऐसा लग रहा था जैसे उन दोनों के बीच की जगह (Space) खिंच गई हो।
"क्या?" गार्ड की आँखें फटी रह गईं।
"तुम बहुत धीमे हो," विक्रम की आवाज़ गूंजी, लेकिन उसके होंठ नहीं हिले।
तभी, दूसरे गार्ड ने पीछे से हमला किया। "मर जा, शैतान!"
उसने अपने हाथों से एक लंबी 'अग्नि कोड़ा' (Fire Whip) बनाई। यह एक एलिमेंटल जीन आर्ट थी। आग का कोड़ा विक्रम की गर्दन लपेटने के लिए आया।
विक्रम ने अपनी गर्दन घुमाई और उस आग के कोड़े को नंगे हाथ से पकड़ लिया।
[विश्लेषण: 'फ्लेम व्हिप आर्ट'। संरचना समझी गई।]
[स्टोरी ऑफ जीन्स: सक्रिय। नकल (Copy) प्रक्रिया शुरू।]
"आग?" विक्रम ने ठंडी मुस्कान के साथ कहा। "आग ऐसी नहीं होती।"
विक्रम ने कल्पना की: 'मेरी आग तुम्हारी आग को खा जाएगी।'
उसके हाथ में पकड़ी हुई आग का रंग बदलकर गहरा नीला हो गया। विक्रम ने कोड़े को एक झटका दिया। गार्ड की अपनी ही आग पलटकर उस पर झपटी, लेकिन अब वह कई गुना ज्यादा गर्म और खतरनाक थी।
"आह्ह्ह!" दूसरा गार्ड चीखता हुआ पीछे गिरा। उसका कवच पिघल रहा था।
तीसरा गार्ड, जो अब तक डर के मारे कांप रहा था, पीछे हटने लगा। "तुम... तुम कौन हो?"
[शेष समय: 10 सेकंड]
विक्रम जानता था कि उसके पास समय कम है। उसका शरीर इस 'गॉड मोड' के भार से अंदर ही अंदर टूट रहा था। लेकिन बाहर से, वह किसी देवता जैसा दिख रहा था।
"घुटने टेको," विक्रम ने आदेश दिया।
उसने कोई शारीरिक दबाव नहीं डाला। उसने बस यह हकीकत बना दी कि गार्ड्स के लिए खड़ा रहना असंभव है।
धड़ाम! धड़ाम! धड़ाम!
तीनों एलीट गार्ड्स, जो कुछ सेकंड पहले उसे मारने आए थे, एक अदृश्य पहाड़ के बोझ तले जमीन पर चिपक गए। उनकी हड्डियां चरमराने लगीं।
[शेष समय: 3 सेकंड]
विक्रम नीचे उतरा। उसने जमीन पर पड़े पहले गार्ड (जिसने रॉक फिस्ट का इस्तेमाल किया था) की आँखों में देखा।
"आज जो तुमने देखा... वह कभी हुआ ही नहीं," विक्रम ने फुसफुसाया।
[समय समाप्त।]
अचानक, वह दिव्य आभा गायब हो गई। विक्रम के बाल वापस काले हो गए और वह धड़ाम से जमीन पर गिर गया। उसके पूरे शरीर में ऐसा दर्द हो रहा था जैसे हज़ारों सुइयां चुभाई जा रही हों। उसकी नाक से खून बहने लगा।
"हा... हा..." विक्रम जोर-जोर से साँस ले रहा था। उसका शरीर पसीने से तर-बतर था।
लेकिन काम हो चुका था।
तीनों गार्ड्स बेहोश पड़े थे। दूसरे गार्ड का कवच जला हुआ था, और बाकी दो मानसिक आघात (Mental Shock) और दबाव के कारण बेहोश थे।
विक्रम ने कांपते हाथों से अपना मुंह पोंछा। "सिर्फ 30 सेकंड... और मेरी हालत खराब हो गई। लेकिन..." उसने अपनी मुट्ठी भींची। उसे अब भी अपनी हथेलियों में उस 'फ्लेम व्हिप' की गर्मी महसूस हो रही थी जिसे उसने कॉपी किया था।
"यह शरीर... यह सच में 'चीट कोड' है। बस मुझे अपनी मूल ताकत (Base Strength) बढ़ानी होगी ताकि मैं इसे ज्यादा देर तक इस्तेमाल कर सकूं।"
तभी, कोठरी के बाहर गलियारे में भारी कदमों की आवाज़ सुनाई दी। शोर सुनकर और भी गार्ड्स आ रहे थे।
विक्रम के पास लड़ने की ताकत नहीं बची थी। उसे अब दिमाग से काम लेना था। उसने जल्दी से खुद को जमीन पर लिटा लिया और बेहोश होने का नाटक किया, जैसे कि उन गार्ड्स के बीच हुई लड़ाई में वह भी घायल हो गया हो।
दरवाजा खुला और लेडी स्कारलेट खुद अंदर आई। उसने नजारा देखा—तीन एलीट गार्ड्स अधमरे पड़े थे, दीवारें झुलसी हुई थीं, और विक्रम एक कोने में पड़ा था।
स्कारलेट की नज़रे विक्रम पर नहीं, बल्कि जले हुए गार्ड पर थीं।
"नीली आग?" स्कारलेट ने बुदबुदाया। "इस शहर में नीली आग का इस्तेमाल सिर्फ एक ही शख्स करता है... 'ड्युक' का सेनापति। क्या यहाँ कोई घुसपैठिया आया था?"
विक्रम ने अपनी आधी बंद आँखों से यह सुना। अनजाने में, उसकी 'गॉड बॉडी' द्वारा बदली गई आग ने स्कारलेट को गलतफहमी में डाल दिया था।
