इन बातो को तभी पढ़ना जब ना ज्यादा दुखी हो ना ज्यादा खुश , ना ज्यादा कोई जिंदगी में हलचल हो , और ना ज्यादा ठेहराव, तब पढना जब तुम जिंदगी में चलते हुए बस सब देख रहे हो अपने आस पास
क्योंकि ये किरदार भी अपनी जिंदगी में कुछ इसी समय में थी, जब कल्पनाएं सच हो रही थीं और जिंदगी बिना मांगे भरपूर दे रही थी, पर कहते हैं ना ज़रुरत से ज्यादा और समय से पहले कुछ भी मिले तो इंसान मदहोश हो जाता है और भूल जाता है कि उसे आगे कीमत भी भरनी पड़ेगी
ये बात है उस दिन की जब हमारी कहानी की किरदार अपने डेस्क पर बैठ कर अपनी घड़ी में समय देख रही थी और फिर अपने लैपटॉप की स्क्रीन पर , अपने हाथ को अपने एक गाल से टिकाकर बैठी हुई, पैर को बार-बार फ्लोर से टैप करते हुए दूसरे हाथ में लगा उसका पेन जो वो अपनी फाइल पर बार-बार प्रेस कर रही थी , आवाज़ कर रहा था और ऐसा करते हुए उसे 20 मिनट हो चुके थे , जैसे ही घड़ी की सुई 1:30 मिनट पर पहुंच जाती है वो मन ही मन खुश होकर फटाफट अपनी डेस्क से उठती है और अपना सामान समेटकर साइड में रख कर एक छोटी अंगड़ाई लेती है
अपने चश्मे को ठीक करते हुए, वो अपना पर्स उठाती है और ऑफिस से निकलती है, बिल्डिंग के नीचे पहुँचते ही बाहर की हवा का हल्का-सा झोंका उसके छोटे बालों से टकराया, जो उसके कंधों तक आते थे।
आज उसने हुडी और जींस पहनी थी, साथ में अपने स्पोर्ट्स शूज़—जो उसे एक अलग ही आराम दे रहे थे।
वो हल्की मुस्कान के साथ आसमान की ओर देखते हुए आगे बढ़ी और मन ही मन बोली—
"आज अगर बारिश हो जाए, तो और भी अच्छा लगेगा…"
बाकी दिनों के मुकाबले आज शहर में थोड़ी कम भीड़ थी।
थोड़ा आगे बढ़ते ही चौराहे पर उसे कई फूलों की दुकानें दिखीं।
वो बिना ज्यादा सोचे, सबसे आखिरी वाली दुकान के अंदर चली गई।
"आपका स्वागत है मैम, आज कौन से फूल दूँ?"
वो हल्का-सा मुस्कुराई और बोली—
"आज… दरअसल, मुझे एक मिक्स्ड फूलों का गुलदस्ता चाहिए।
जिसमें कुछ लिली हों, कुछ सफेद गुलाब… और कुछ डैंडेलियन्स, छोटे सफेद फूलों के साथ।"
"जी मैम।"
वो हल्के से आसपास देखने लगी। उसकी नज़र हर फूल पर ठहरती, जैसे सोच रही हो—शायद ये उन्हें पसंद आएंगे।
इन छोटे-छोटे ख्यालों ने उसके चेहरे पर एक प्यारी-सी मुस्कान ला दी।
तभी एक आवाज़ ने उसकी सोच को हल्के से तोड़ा—
"ये रहे आपके फूल, मैम।"
उसने फूल लिए, पेमेंट किया और दुकान से बाहर निकल आई।
अब उसके कदम पहले से थोड़ा तेज़ थे।
वो आगे बढ़ती गई और कुछ ही देर में पास के एक शांत-से गार्डन में पहुँच गई—जहाँ आमतौर पर ज्यादा लोग नहीं आते थे।
लेकिन आज वो जगह उसके लिए खास थी।
क्योंकि आज उसे वहाँ किसी से मिलना था…
एक ऐसा इंसान, जिसके लिए वो आज जल्दी-जल्दी सब काम खत्म करके आई थी।
कुछ कदम चलने के बाद उसकी नज़र एक बेंच पर पड़ी।
वहाँ एक बुज़ुर्ग महिला बैठी थीं—लगभग साठ-सत्तर साल की।
उनके चेहरे पर सर्दियों के चाँद जैसा हल्का-सा नूर था—थोड़ा फीका, थोड़ा शांत।
उन्होंने एक सादी-सी, लेकिन खूबसूरत साड़ी पहन रखी थी।
उनकी साँसें अब एक ठहराव के साथ चल रही थीं, जैसे वो शांति से किसी का इंतज़ार कर रही हों।
उनके छोटे बाल हल्के सफेद और ग्रे थे, और शरीर थोड़ा भरा हुआ था।
उनके पास एक लड़की खड़ी थी, जिसे देखकर लगता था कि वो एक नर्स है।
"मैंने ज़्यादा इंतज़ार तो नहीं करवाया आपको… My Majesty?"
उसने हल्के मज़ाकिया अंदाज़ में कहा और पास आकर उन्हें गले लगा लिया।
उन्होंने एक पल के लिए नर्स की ओर देखा।
फिर उसकी तरफ मुड़ते हुए, होंठों पर हल्की-सी नरमी लिए बोलीं—
"ज़्यादा नहीं… बस पंद्रह मिनट हुए हैं।"
"I'm sorry, daadi… मैं जितना जल्दी हो सका, ऑफिस से निकल आई।"
उन्होंने उसकी ओर देखते हुए थोड़ा सा आश्चर्य जताया—
"तुम आज भी ऑफिस गई थी?"
"हाँ, थोड़ा काम ज़्यादा था…"
उसने धीरे से वो गुलदस्ता उनके हाथों में थमाया।
उन्होंने ध्यान से उन फूलों को देखा।
उनके चेहरे पर एक हल्की-सी संतुष्टि उतर आई।
"पसंद आए?" उसने हल्के से पूछा।
"बहुत… बिल्कुल मेरी पसंद के।"
वो एक पल के लिए रुकीं, फिर थोड़ा शरारती अंदाज़ में बोलीं—
"पर क्या… बस इतना ही?"
उसकी आँखों में एक अलग-सी उत्सुकता उभर आई।
वो हल्का-सा झुककर बोली—
"ऐसे कैसे…
मैं अपनी Birthday Queen के लिए एक बहुत स्पेशल गिफ्ट लाई हूँ।"
