कोहरे वाली रात फिर आई
उस घटना के बाद कई दिन तक मैं बिल्कुल चुप रहने लगा।
मेरे दोस्तों ने भी उस रास्ते पर जाना बंद कर दिया।
लेकिन एक रात…
फिर वही घना कोहरा छा गया।
सुबह लगभग 3:30 बजे मुझे अचानक नींद खुली।
मुझे ऐसा लगा जैसे कोई मुझे बुला रहा हो।
धीरे-धीरे एक आवाज़ मेरे कानों में गूंज रही थी —
"सच अभी पूरा नहीं हुआ…"
मैं डर गया।
लेकिन मेरे मन में एक अजीब सा खिंचाव था।
मैं घर से बाहर निकल गया।
और मेरे कदम…
अपने आप उसी रास्ते की तरफ बढ़ने लगे। please comment karna jarur
