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Chapter 1 - सपनों की दुनिया

रात के 2 बजे थे। चारों तरफ सन्नाटा था, लेकिन आरव की आँखों में नींद नहीं थी। हर रात उसे एक अजीब सपना आता—एक ऐसी दुनिया, जहाँ आसमान नीला नहीं बल्कि बैंगनी होता था, पेड़ हवा में तैरते थे, और जमीन चमकती हुई कांच जैसी दिखती थी।

उसने कई बार खुद से कहा—"ये बस सपना है…"लेकिन अंदर कहीं न कहीं उसे लगता था कि ये सपना नहीं, एक सच्चाई का दरवाज़ा है।

एक रात, जब आरव फिर से वही सपना देख रहा था, उसने पहली बार कुछ अलग किया—वह डरने के बजाय आगे बढ़ा।

अचानक, उसके सामने एक चमकता हुआ दरवाज़ा प्रकट हुआ।दरवाज़े पर लिखा था—"सपनों की दुनिया में आपका स्वागत है"

आरव ने जैसे ही दरवाज़ा खोला, वह एक नई दुनिया में पहुँच गया।

यह दुनिया बिल्कुल अलग थी—

पेड़ हवा में तैर रहे थे 🌳 जानवर इंसानों की तरह बात कर रहे थे 🐾 नदियाँ चाँदनी की तरह चमक रही थीं 🌊

वहाँ एक छोटी सी लड़की मिली, जिसका नाम तारा था।

तारा बोली—"यह दुनिया उन लोगों की है, जो अपने सपनों पर विश्वास करते हैं। लेकिन यह अब खतरे में है…"

तारा ने बताया कि इस दुनिया पर एक अंधेरा छा रहा है—एक शक्ति, जो लोगों के सपनों को खत्म कर रही है।

"अगर सपने खत्म हो गए, तो ये दुनिया भी खत्म हो जाएगी…"

आरव ने पूछा—"मैं क्या कर सकता हूँ?"

तारा मुस्कुराई—"तुम्हें अपने डर से लड़ना होगा… क्योंकि वही इस अंधेरे की ताकत है।"

अचानक, अंधेरा उसके सामने एक राक्षस बनकर खड़ा हो गया—वो राक्षस कोई और नहीं, बल्कि आरव के अपने डर थे।

असफलता का डर अकेलेपन का डर खुद पर भरोसा न होने का डर

आरव पहले डर गया… लेकिन फिर उसने अपनी आँखें बंद कीं और खुद से कहा—"मैं डर से नहीं, अपने सपनों से बनता हूँ।"

जैसे ही उसने ये कहा, उसके अंदर एक रोशनी जग गई।

उस रोशनी ने अंधेरे को धीरे-धीरे खत्म कर दिया।पूरी दुनिया फिर से चमक उठी।

तारा मुस्कुराई—"तुमने न सिर्फ इस दुनिया को बचाया… बल्कि खुद को भी।"

अचानक, आरव की आँख खुल गई।

वह अपने कमरे में था…लेकिन इस बार कुछ अलग था—

उसके अंदर अब डर नहीं था…सिर्फ हिम्मत और विश्वास था।

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