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Chapter 1 - Unnamed

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आखरी मुलाक़त

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Akbar Ali

Romance

4

आखरी मुलाक़त

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love prem love story hindi story

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हमारे उसके बीच सब खत्म हो गया था। मैं अपने रास्ते अपनी ज़िन्दगी गुजार रहा था और वह अपने रास्ते अपनी ज़िन्दगी जी रही थी।कभी अर्जुन और नेहा के प्यार के लोग चर्चे करते थे और अब तो हम अपने बारे में बात करना भी पसंद नहीं करते हैं लोगों की तो बहुत दूर की है।मैं अर्जुन और मेरी गर्लफ्रेंड नेहा जोकि कभी हुआ करती थी ना जाने हमारे प्यार को किसकी नजर लग गई थी। हमारा ब्रेकअप तो 6 महीने पहले ही हो गया था। लेकिन उसने मुझे आज फ़ोन करके बुलाया है ना जाने क्यों।

क्लास 12थ बोर्ड की परीक्षा हर बच्चे की लाइफ में आती है किसी की लाइफ फैल करके बर्बाद कर देता है तो किसी की लाइफ टॉप करके बना देता है लेकिन ये बोर्ड परीक्षा ने नाही मेरी लाइफ बनायी है और नाही बर्बाद की है बल्कि बोर्ड परीक्षा ने मुझे वैसा बनने पर मजबूर कर दिया था जिसको अच्छा आदमी कभी पसंद नहीं करता। चलिए मैं शुरू से शुरू करता हूं।

[फ्लैशबैक इन]

मेरा नाम अर्जुन यादव है मैं यूपी से प्रयागराज (इलाहाबाद) का रहने वाला हूं। मैं पीसीएम यानी फिजिक्स केमिस्ट्री मैथ की तरफ से इस बार 12th का बोर्ड देने वाला हूं। स्कूल की तरफ से मुझे छुट्टी मिल चुकी है और मैं घर में तैयारी भी करना शुरू कर दिया अब आपको पता होगा लड़के लोगों की तैयारी कैसी होती है मैं वैसेही तैयारी कर रहा था।

दिन कटता गया, मैं पढ़ता गया समय बिल्कुल पतंग की तरह मानो आसमान में निकलता गया कल सुबह मेरे बोर्ड की परीक्षा है।अगले दिन मैं अपने सेंटर आधा घंटा पहले ही आ गया फिर क्या था दोस्तो के साथ मौज-मस्ती तभी मेरी नजर वहा खड़ी एक लड़की पर पड़ी वह सर झुकाए हुए अपने दोस्तों के साथ खड़ी थी तभी उसकी दोस्त मैं से एक लड़की ने कोई जोक मारा जिससे सर झुकाए खड़ी लड़की को भी हंसी आ गई। जोक कैसा था मुझे नहीं पता लेकिन उन सबसे ज्यादा मैं मुस्कुरा रहा था। वह लड़की कमाल की खूबसूरत थी मेरी निगाह उस लड़की से हट ही नहीं रही थी।तभी सेन्टर का गेट ओपन हुआ और मैं अपने दोस्त के साथ अंदर आ गया।

मेरा रोल नंबर 1616403 था जो कि भारतीय रेलवे के गाड़ियों के नंबर से भी अधिक था।मैंने वहां दीवार पर लगी नोटिस की तरफ देखा जिस पर रोल नंबर के हिसाब से कमरा नंबर दिया गया था।मेरा कमरा नंबर 2 था। दो अलग स्कूल वाले लोग भी इस सेंटर में परीक्षा देने आए हुए थे।मैं कमरा नंबर 2 में गया और अपनी सीट ढूंढ के बैठ गया तभी वहां एक दाई आयी और मुझे आकर घूरने लगी।

"क्या है, मैंने दाई से बोला।'

दाई ने अजय देवगन की जुबा केसरी की तरह अपनी दोनों आँखें दिखाई और आगे बढ़ गई।मुझे कुछ समझ में नहीं आया और मैंने इस बात को इग्नोर किया।कुछ सेकंड बाद मैंने देखा सामने से वही लड़की रूम नंबर 2 की तरफ चली आ रही है मुझे जितने भगवान के नाम याद थे मैंने सब से प्रार्थना की, कि मेरे बगल में बैठने वाली लड़की नेहा शर्मा यही हो। मैंने आते साथ ही देख लिया था कि मेरे अगल-बगल कौन बैठने वाला है शायद वह दाई ने मुझे ऐसा करते हुए देख लिया हो तभी कुछ दिखाना चाह रही हो एनीवे।मैं चौथी बेंच पर बैठा हुआ था।वह लड़की दूसरी बेंच की तरफ अपना रोल नंबर देखती हुई आगे बढ़ रही थी।मैंने अपनी आंखें बंद कर ली थी।

तभी एक सर ने चिल्लाकर बोला "सब लोग अपनी जगह पर आंख और कान खोलकर सुनो, मैंने तुरंत अपनी आंखें खोल दी मेरे बगल में वह लड़की तब तक आकर बैठ चुकी थी। "आप लोग नकल करना चाहते हो, सर ने पूछा।"

"जी सर, सब बच्चों ने चिल्लाकर बोला।"

"नही कर पाओगे, सर ने हंसते हुए बोला उनको हंसता हुआ देखकर मैं भी हंसने लगा। "ऐसी कोई उम्मीद लगाई है तो छोड़ दो, कैमरा लग चुका है, ऊपर दीवार की तरफ दिखा कर कहा।"

सब बच्चों का मुंह उतर गया था लेकिन मैं खुश था क्योंकि मेरे बगल में आकर वही लड़की बैठी जिसके लिए आज कितने दिनों बाद मैंने एक साथ इतने भगवानों को याद किया था।सर ने सबको क्वेश्चन पेपर और आंसर शीट बाटी।आज हमारे हिंदी का पेपर था मैंने क्वेश्चन पेपर को ऊपर से लेकर नीचे तक देखा मुझे लगा था पेपर बहुत अच्छा होगा लेकिन क्वेश्चन पेपर को देखने के बाद अब पासिंग मार्क्स भी आ जाए तो बड़ी बात है। मैंने अपनी बगल में बैठी लड़की की तरफ देखा उसने तो लिखना भी शुरू कर दिया था। और मैंने अभी अपना रोल नंबर भी कॉपी में नहीं भरा था।मैंने जल्दी से अपना रोल नंबर और सारी डिटेल भरी।

"एक्सक्यूज मी, मैने अपने बगल वाली लड़की की तरफ देख कर बोला।"उसने मेरी तरफ देखा

"आपको जो कुछ भी पूछना होगा मुझसे पूछ लियेगा, 'मैने क्वेश्चन पेपर की तरफ इशारा करके लड़की से कहा।"लड़की ने हल्की सी स्माइल की।वह बात अलग थी कि मुझे पासिंग मार्क्स भी मिल जाए तो बहुत बड़ी बात है।

"एक्सक्यूज मी, मैंने फिर उस लड़की से कहा।

"क्या है, लड़की ने मेरी तरफ देखकर पूछा।

"आप भी बोलिये, 'जो तुमको भी नहीं आता होगा पूछ लेना, मैंने लड़की से कहा।"

"ठीक है पूछ लेना, लड़की ने इतना बोला और लिखने लग गई।"

मैंने अपने काम भर का जुगाड़ निकाल लिया था।मुझे जो-जो आता था उसको करके मैं भी और लोगों की तरह कॉपी भरने में लगा हुआ था।

आधे घंटे पहले ही मेरे बगल की लड़की ने पेपर समाप्त कर लिया था। मैंने उसकी तरफ देखा वह शांति से बैठी हुई थी।

"आपको कुछ पूछना है, मैंने उस लड़की से पूछा।"

"नो थैंक्स, 'मेरा सब हो गया।"

"अरे वाह, 'कमाल है आप, 'पीछे के 5 क्वेश्चन बता दीजिए मुझे, मैंने लड़की से कहा।"लड़की के मुंह पर अजीब सा रिएक्शन आराम से देखा जा सकता था। फिर पता नहीं क्या सोच कर उसने अपनी कॉपी खोलकर मेरी तरफ घुमा दिया। जिससे मेरे नंबर को काफी बूस्ट मिली।3 घंटा पूरा होने पर हम से कॉपी ले ली गई।

"पेपर काफी अच्छा हुआ, 'नही, मैंने बगल वाली लड़की से पूछा।

"पेपर अच्छा नहीं हुआ, 'अच्छा करवा दिया गया, लड़की ने मज़ाक उड़ाते हुए कहां।" मैं हंसने लगा।

"मेरा नाम अर्जुन यादव, 'और आप, मैंने अपना हाथ आगे बढ़ाते हुए उस लड़की से पूछा।"

"मैं नेहा शर्मा, 'और मुझे तुम आप-जनाब से मत बुलाओ, उसने हाथ मिलाते हुए कहां।"

नेहा उठी और अपने दोस्तों के साथ निकल गई। मैं भी अपने दोस्तों के साथ निकल गया।मैंने निकलते हुए देखा जो विषय मेरा था वही विषय नेहा का भी था। मुझे इतनी खुशी हुई जितनी अक्षय कुमार की फिल्म रिलीज होने पर भी नहीं होती।मैं घर आया खाना-पीना किया। और अगले पेपर की तैयारी करने लगा।दूसरा पेपर अंग्रेजी का था जो कि ठीक-ठाक हुआ। अब हम दोनों में काफी अच्छी दोस्ती भी हो गई थी। इस बार मैंने कॉपी दिखाने को नहीं कहा वह खुद सामने से देखा रही थी अब उसको मना थोड़ी ना कर सकते वह बुरा मान जाती।

तीसरा पेपर केमिस्ट्री का था। यह भी बहुत ठीक हुआ था। इस पेपर मैं भी उसने मेरी काफी मदद की थी। मैं समझ गया था नेहा एक टॉपर स्टूडेंट है।

चौथा पेपर फिजिक्स का था यह पेपर भी ठीक-ठाक हुआ था। यह पेपर बाद मैंने उसको छोले-भटूरे की ट्रीट दी। हमने गुंचे के छोले-भटूरे खाए उसके बाद उसको मैंने नफीस कांप्लेक्स तक छोड़ा। और मैं अपने घर आ गया।पांचवा पेपर मेरा गणित का था। मेरी गणित बचपन से ही स्ट्रांग थी क्लासिक 6th में मैंने गणित में 100 में से 96 नंबर लाए थे। और मैं अपने गणित वाले सर का सबसे अच्छा स्टूडेंट था। कभी क्लास में कोई लड़का उनसे सवाल पूछता तो वह उसको मेरा नाम बता कर मेरे पास भेज देते थे जाओ अर्जुन से पूछ लो। बच्चे पीठ पीछे सर को अमरुद बुलाते थे। अब वह बच्चों का प्यार था या चिढ़ाना वह आप बेहतर समझ सकते हो।आज गणित का पेपर है मैंने काफी अच्छी तैयारियाँ कर ली है। मैंने निकलते वक्त अपने माता-पिता का आशीर्वाद लिया जैसे कि मैं हर पेपर के समय करता हुआ आता हूं।

मैं अपने सेंटर पहुंचा जहां पर शेड्यूल बदल गया था। मैंने दीवार पर लगी नोटिस देखी उससे मुझे पता चला कि मुझे आज कमरा नंबर 4 में बैठना है। मुझे इस बात की खुशी थी कि उस नेहा का भी रोल नंबर कमरा नम्बर 4 में आया हुआ था।मैं कमरा नंबर 4 में पहुंचा।

मैंने अपनी सीट देखी जो कि कमरा नंबर 4 के गेट के सामने वाली थी। मैं पहली सीट पर जाकर बैठा। मैने अपने बगल में बैठने वाली लड़की का नाम देखा लेकिन वह बैठने वाली नहीं बल्कि बैठने वाला निकला जिसका नाम केशव मौर्य था।मैंने अपने पीछे की तरफ सीट पर देखा जहां नेहा का नाम मुझे नहीं दिखा। लेकिन जब मैंने सामने देखा तो नेहा वहां से चलती हुई मेरे कमरे की तरफ चली आ रही थी।सर क्लास में आ चुके थे।नेहा मेरी तरह आयी और मेरे बगलवाले का नाम पढ़ी जोकि केशव की सीट थी।

"मेरे पैर में बहुत दर्द हो रहा, 'मैं यहीं बैठ जाऊं, नेहा ने सर से कहा।"

मैं नेहा का चेहरा देख रहा था मैं सच बताऊं तो मैं नेहा को पहचान नहीं पाया कि यह सर झुकाए खड़ी वही लड़की है जिसको पहली बार मैने देखा था या कोई और लड़की है।

"क्या हुआ बेटा, सर ने हमदर्दी के साथ पूछा।"

"कुदरत की मार सर, 'मैं आ रही थी, 'अचानक मेरा पैर मुड़ गया सर, मैं चल नहीं पा रही हू, लगता है मोच आ गई, नेहा ने सर से कहा।"

"तुम्हारा नाम तो नेहा शर्मा है ना जब मैंने कॉपी में तुमसे साइन करवाया था तो मैंने तुमको यही नाम लिखते हुए देखा था।"

"जी सर, 'मैं नेहा शर्मा ही हूं।"

"फिर तुम को कैसे कुदरत की मार पड़ गई, सर की यह बात सुनकर पूरा कमरा नम्बर 4 हँसने लगा।"

मैंने भी अपनी हंसी को ने की कोशिश की।

उतने मैं पीछे से केशव मौर्य भी आ गया। और अपना रोल नंबर देखकर वहीं खड़ा हो गया।

"सर ये सब मेरी पड़ोसी रेहाना खाला की लड़की अलीशा का करम है। मैं काफी वक्त उसके साथ बिताती हूं, हम अच्छे दोस्त हैं, नेहा ने कहा।

"ठीक है, 'तुम यहां बैठ जाओ यहां वाले को मैं तुम्हारी सीट पर बैठा दूंगा, सर ने कहा।"

"सर यह मेरी सीट है, पीछे खड़े केशव ने बोला।"

"तुम इसकी सीट पर जाकर बैठ जाओ इसके पैर में मोच आ गई है, सर ने केशव से बोला।"

जब तक नेहा मेरे बगल में बैठ चुकी थी।

"सर अभी तो यह ठीक से चल रही थी, 'मैं भी इसके पीछे ही आया हू, केशव ने बोला।"

"यहीं पर मोच आयी है, 'अभी तो तुम्हारा हाथ-पैर भी ठीक है, 'क्या पता बाहर निकल के इसपे प्लास्टर चढ़ जाए, नेहा ने खड़े होकर केशव से बोला।"

"ओ तुम बैठ जाओ, सर मैं नेहा से चिल्ला कर कहा। ओये तुम जाकर इसकी जगह बैठ जाओ, सर ने केशव से कहा।"

केशव नेहा की जगह जाकर बैठा। नेहा ने मेरी तरफ देख कर मुझे आँख मारी। सर ने क्वेश्चन पेपर और आंसर सीट बाटी।मैंने सुना था लड़कियों की गणित बहुत कमजोर होती है। लेकिन नेहा को देखने के बाद मुझे इस बात पर यकीन नहीं रहा।वह हर पेपर की तरह इस पेपर को भी आसानी से करने लगी।गणित मेरी भी अच्छी थी इसलिए मैं भी अपना करने में व्यस्त हो गया।मैंने अपना पेपर कंप्लीट कर के नेहा की तरफ देखा वह एक सवाल में फंसी हुई लग रही थी।

"2x से सब को मल्टिप्लाई कर दो उत्तर आ जाएगा, मैंने नेहा से कहा।"

"थैंक्स, नेहा ने बोला और मल्टिप्लाई करने लगी।"

उसने भी लगभग अपना पेपर खत्म ही कर लिया था। यह मेरा पहला पेपर था जिसमें नेहा ने मुझे नहीं मैंने नेहा को कुछ बताया हो।हम पेपर देकर बाहर आए यह हमारा आखिरी पेपर था हम फिर से गुंचे के छोले-भटूरे खाने गए।

"भैय, 'दो प्लेट लगाओ, मैंने छोले वाले भैय से बोला।"

"अच्छा भैया 1 मिनट, छोले वाले ने बोला।"

मैंने जेब में पड़े फोन की स्विच ऑन की और उसको एक जोक दिखाया जिसको पढ़ने के बाद नेहा 1 मिनट तक अपनी हंसी नहीं रोक पाई।

नेहा ने मुझे अपना नंबर दिया और कहा यह जोक्स मुझे व्हाट्सएप कर देना।मैंने उसका नंबर सेव किया और उसको जोक्स सेंड कर दिया।

हमारी प्लेट भी हमारे सामने छोले वाले ने ला कर रख दी थी।इतने में सब शांत हो गया।नेहा ने मेरी आँखों में देखा मैंने अपनी तरफ नेहा को देखकर अपनी आंखें छोले-भटूरे की तरफ कर ली। फिर मैंने उसकी आँखों की तरफ फिर से देखा उसने ऐसा देखते हुए मुझे देखा और अपनी आँखें छोले-भटूरे की तरफ करली और बोली "छोले से कितना धुआं निकल रहा है, 'मैंने बोला, 'भटूरे से उससे ज्यादा धुआं निकल रहा है।" हम दोनों हंसने लगे।

हमने छोले-भटूरे खत्म किएशायद हम जान चुके थे कि एक दूसरे की फीलिंग क्या है।मैं नेहा को घर छोड़ने के लिए आया।मेरी पूरी जिंदगी के 5 सबसे अच्छे दिन यह बोर्ड के थे। मैंने इनडायरेक्टली नेहा को बताया कि तुम्हारे साथ बिताया गया समय मेरी जिंदगी का सबसे अच्छा समय था। शायद ये बात वह समझ गई थी।

"मेरा भी, नेहा ने बोला और अपने नफीस कंपलेक्स के अंदर चली गई।"

मैं अपने घर की तरफ निकल गया था घर आकर खाना खाकर मैं सो गया था।शाम को मेरी आँख खुली तो मेरे फोन की नोटिफिकेशन लाइट जल बुझ रही थी। मैंने फोन देखा तो नेहा का लाफिंग वाला एक इमोजी आया था और एक मैसेज पढ़ा हुआ था।

"घर पहुँच गए?"मैंने तुरंत रिप्लाई किया।

रिप्लाई करके मैं नीचे हाथ मुंह धो कर आया।माँ-पिताजी नीचे रहते हैं और मैं ऊपर के रूम में रहता हूं।

माँ के पास मैं गया जोकि रात का खाना बना रहीं थी। मैं अपने घर में एक ही लड़का हूं मैंने मां का हालचाल पूछा और रात का खाना खाकर ऊपर अपने रूम में आ गया।मैंने अपना फोन उठाया और डाटा चालू किया जोकि चार्ज में लगा हुआ था। वैसे ही नोटिफिकेशन आई जो कि नेहा का मैसेज था

आई लव यू

मुझें इस मैसेज पर यकीन नहीं हो रहा था। यह मैसेज देखकर मैं इतना खुश हुआ कि मैं आपको बता भी नहीं सकता हूं। एक लड़की आपको सामने से प्रपोज कर रही है भगवान तेरी लीला कमाल है। सबसे अच्छा मेरा ये वाला साल है। मुझे खुद नही समझ आ रहा था मैं क्या करूँ।

मैंने रिप्लाई किया

आई लव यू टू

मेरे इतना मैसेज करने के बाद नेहा तुरंत ऑनलाइन आ गई उसने एक कपल का इमोजी भेजो और एक रेड गाल वाला स्माइली भेजा।धीरे-धीरे हम दोनों काफी प्राइवेट बातें करने लगे व्हाट्सएप से ज्यादा अब हमारी फोन पर बात होने लगी और हफ्ते में दो-तीन बार वीडियो कॉल भी हो जाती थी।

इस बीच नेहा टिक टोक में वायरल हो गई और उसको 1 महीने के अंदर ब्लूटिक मिल गया जिससे उसके ट्विटर के भी फॉलोअर इंक्रीज हो गए।

हम दोनों का रिलेशनशिप काफी अच्छा चल रहा था।हम दोनों इधर-उधर घूमने जाते खूब मस्ती करते इसी बीच नेहा ने मेरी पिक अपने ट्विटर हैंडल पर मुझे टैग करके शेयर कर दी।फिर क्या था रातो-रात मेरे भी ट्विटर के फॉलोअर्स इंक्रीज होने लगे हमारा रिलेशनशिप पब्लिक हो गया था।

अब लोग अर्जुन और नेहा के प्यार के चर्चे करने लगे। क्या कपल है दोनों, एक साथ कमाल लगते हैं आदि- आदि। अब हमारे प्यार के चर्चे दूसरों की जबानों पर हो रहे थे।नेहा शायद पहली ऐसी टिकटोंकर होगी जिसने फेमस होने के बाद इतनी जल्दी अपना बॉयफ्रेंड रिवील कर दिया।

6 महीने तक हम लोग साथ रहे बहुत खुश रहे। हल्का-फुल्का झगड़ा कभी-कभी हो जाया करता था और कुछ घंटों या दिन बाद सब पहले जैसा हो जाता था।

इसी बीच वह और भी ज्यादा पॉपुलर होती रही।उसे इस बात का घमंड हो गया था जो कुछ हूं मैं हूं मेरे सिवा कोई भी नहीं। एक दिन उसने मुझे एक कैफ़े मैं मिलने को बुलाया।मैं कैफ़े पहुचा।

"मुझे तो लगभग पूरा इंडिया जानता है तुम्हे कौन जानता है, नेहा ने मुझसे बोला।"

"मुझे तुम जानती हो ना, 'मेरे लिए इतना ही काफी है, मैंने नेहा से हल्की इस्माइल के साथ बोला।"

"लेकिन इतना काफी नहीं है, नेहा ने कहा।"

"तुम ही बोल दो तुम क्या चाहती हो, मैंने कहा।"

"हमे अपने रास्ते अलग कर लेना चाहिए, 'हमें ब्रेकअप कर लेना चाहिए, नेहा ने बिना कुछ समझे बोला।"

"तुम ऐसा ही चाहती हो, 'तो ऐसा ही सही, मैंने नेहा से कहा और उस कैफ़े से निकलकर घर आ गया।"

अब मेरे नेहा के बीच में कुछ भी नहीं था सब खत्म हो गया था।

मैं घर आकर माँ के गले लग कर रोने लगा। माँ के लाख पूछने पर भी मैंने माँ को नहीं बताया कि मेरे साथ क्या हुआ है। माँ शायद समझ गई थी जो लड़का पहले इतना खुश रहता हो और आज आकर ऐसे रोने लगे कुछ तो गड़बड़ है।नेहा ने भी ट्विटर पर यह बात ऑफिशल अलाउंस कर दी थी कि उसका ब्रेकअप हो गया है।मुझे नेहा की याद आती तो मैं कभी-कभी उसको टिक टॉक खोल कर देख लिया करता था। धीरे-धीरे मैं ऐसा करना भी बंद करना चाहता था लेकिन यह मुझसे हो नहीं पा रहा था।

[फ्लैश बैक आउट]

आज लगभग हमें दूर हुए पूरे 6 महीने हो गए हैं। नेहा ने मुझे आज कॉल किया और उसी कैफ़े बुलाया जहां हमारी आखिरी मुलाकात हुई थी।मैं उससे मिलने को मान गया क्योंकि उसने बोला था यह मेरी जिंदगी का सवाल है और मेरी जिंदगी और उसकी जिंदगी अलग है क्या।मैं नेहा से मिलने कैफ़े आया जहां से हम अलग हुए थे।नेहा वहां पहले से बैठी हुई थी।मैं जाकर उसकी वाली टेबल पर बैठा ठीक उसके सामने, नेहा ने दो कॉफी ऑर्डर की।

"कैसे हो, नेहा ने मुझसे पूछा।"

"मैं ठीक हूं, 'तुम कैसी हो, मैंने नेहा से पूछा।"

"मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई थी। मैं घमंडी हो गई थी, 'मुझे तुम्हारे साथ ऐसा नहीं करना चाहिए था आई एम रियली सॉरी, नेहा ने कहा।"

मुझे लगा मेरा प्यार मुझे वापस मिलने वाला है। लेकिन कहानी अभी बाकी थी।

"ये लो मेरा शादी का कार्ड,नेहा ने अपने पर्स से एक कार्ड देते हुए कहा।ये सुनकर मेरे पैरों तले जमीन निकल गई।मैंने काट को पकड़ा और देखा जिस पर लिखा हुआ था "नेहा शर्मा वेड्स अभय सिंह" ।

"चलो यह तो अच्छी बात है, मैंने नेहा से कहा। मेरा दिल रो रहा था यह बात सिर्फ मैं ही जानता था।"

"लेकिन मैं शादी नहीं करना चाहती हूं, नेहा ने कहा।"

यह बात सुनकर मुझे बहुत खुशी हुई।

"क्यों क्या दिक्कत है, मैंने नेहा से पूछा।"

"मैं अभी इतनी जल्दी शादी नहीं करना चाहती हूं। अपनी जिंदगी जीनी है, 'ऐश करना है, और भी बहुत सपने है मेरे, नेहा ने बोला।'

तभी नेहा का फोन रिंग होता है।

"हा जान क्यों नहीं, 'ऑफ कोर्स हम लोग आज मिलेंगे, नेहा ने फोन पर बोला।"

नेहा ने फोन काटकर मुझसे बोला "मेरा बॉयफ्रेंड है"।

मैं सोचने लग गया था कभी यह मुझे जान बोल कर बुलाती थी आज कोई और आ गया है। कभी यह मुझसे हंस कर बात करती थी आज कोई और आ गया।

नेहा ने मेरे मुंह के पास एक चुटकी बजाए जिससे मैं होश में आया, ''कहां खो गए थे, नेहा ने बोला।"

"नही, 'कही नही, मैंने नेहा से बोला मैं 1 मिनट में आया मैं अंदर कैफ़े के वॉशरूम में गया और अपना फेस धोकर वापस आया ताकि मेरा बहता हुआ आंसू भी नेहा को पानी लगे।"

"हां, 'अब बोलो मैं तुम्हारे लिए क्या कर सकता हूं, मैंने नेहा से पूछा।"

"बस मेरी शादी कैंसिल करवा दो, नेहा ने बोला।"

एक मिनट अपना कान नीचे लाना मैंने नेहा को एक आईडिया दिया।

"अरे वाह, इससे पक्का शादी कैंसिल हो जाएगी, 'नेहा ने एक्साइटेड होकर बोला।"

"हां चलो मिलते हैं तुम्हारी शादी के दिन, मैंने नेहा से कहा और अपने घर जाने को निकल गया।"

"क्या लगता है, 'आपको नेहा की शादी कैंसिल होगी, सवाल ही नहीं होता, 'कहानी में नया हीरो आ गया है, 'इसलिए अब मुझे कहानी में बने रहने के लिए कहानी का विलेन बनना होगा।"

तैयार रहना हम जल्दी ही मिलते हैं। हीरोइन की शादी में हमारी आपसे आखरी मुलाकात वहीरावी अपने दोस्तों के साथ घूमने गई थी और वहा शिवा भी अपने दोस्तों के साथ घूमने आया था। रावी की दोस्त और शिवा का दोस्त एकदूसरे से प्यार करते थे कुछ बातों से उनके बीच misunderstanding हो गई थी। रावी और शिवा उनको समझा रहे ताकी उनका झगड़ा सुलझ सके। रावी और शिवा एक दूसरे को पहिली बार वही मिले थे। रावी के दोस्त ने रावी के mobile से शिवा को call किया था इस वजह से रावी का number शिवा के पास चला गया। धीरे धीरे वे एक दूसरे से बाते करने लगें और नजदीक आने लगे। बाते बढ़ गई थी इसलिए नजदीकियां भी बढ़ने लगी थी। बार बार मुलाकाते होने लगी थी। दोनों एक दूसरे को चाहने लगे थे पर दोनों बोल नहीं पा रहे थे। वे दोनों अपने दोस्तों के साथ बाहर घूमने गए थे तभी शिवा और रावी ने शर्माते हुए प्यार का इकरार किया। अब दोस्ती का रिश्ता प्यार में बदल रहा था। दोनों एक दूसरे को समझने लगे थे। धीरे धीरे दोनों को एक दूसरे की आदत होने लगी थी। फिर एक दिन कुछ ऐसा हुआ की शिवा और रावी एक दूसरे से दूर हो गए। शिवा के घर वालों को उन दोनों के बारे में बाहर से पता चला उन्होंने शिवा और रावी को एक दूसरे से दूर कर दिया फिर भी शिवा और रावी एक दूसरे से दूर नहीं हो पाए। उनका प्यार बहुत गहरा था इसलिए किस्मत उनको मिलाती रहीं। दो महीने बाद शिवा और रावी की मुलाकात एक मंदिर में हुई वे दोनों वहा मिले थे एक दूसरे को देखा था पर बात नहीं कर पाए। उस मुलाकात से दोनों भी अनजान थे पर किस्मत का खेल देखो उन दोनों को मिला ही दिया। दो reasons की वजह से शिवा और रावी के रिश्ते में दरारे आ रही थीं। शिवा के घर वाले पुराने जमाने के थे इसलिए वे love marriage के खिलाफ थे और रावी के घर वाले भी love marriage के खिलाफ थे। दूसरा कारण ये था कि उन दोनों की caste अलग थी इसलिए शिवा के घर वाले रावी से नफरत करते थे। शिवा के घर वालों ने शिवा को बहुत मारा और शिवा से वचन लिया की वो रावी को छोड़ दे और उसे भूल जाए। दो साल बीत गए फिर भी शिवा रावी को भुला नहीं पाया। वे दोनों आज भी एक दूसरे से प्यार करते थे। रावी और शिवा settled नहीं थे इसलिए घर वालों को मना नहीं पा रहे थे। वे दोनों settled होने की कोशिश कर रहे थे ताकी अपने घर वालों को मना सके। दोनों का ये प्रयास लगातार चल रहा था। रावी के घरवालों ने रावी के लिए रिश्ता देखना शुरू कर दिया था। शिवा settled नहीं था इसलिए रावी शिवा को कुछ बोल नहीं पा रहीं थी और अपने घरवालों को भी मना नहीं पा रही थी। ये सिलसिला लगातार जारी था। दिन बीतते जा रहे थे पर समस्या का कोई हल नहीं मिल रहा था। दोनों भी एकदूसरे को पाने के लिए जी जान से कोशिश कर रहे थे। बोहोत बार उनकी कोशिशे नाकामयाब रही। फिर भी उन दोनों ने हार नहीं मानी। उनकी कोशिश जारी थी। देखते है अभी उनकी कोशिशें सफल होती है या नहीं।