सुबह का समय था। गांव के छोटे-छोटे घरों में धुएं उठ रहा था। पंछियों की आवाज चारों तरफ गूंज रही थी। लेकिन उसे सुंदर माहौल के बीच एक घर ऐसा भी था जहां शांत कम और चिंता ज्यादा थी। यह घर था अमन का। अमन लगभग 16 साल का था। दुबला पतला शरीर,आंखों में गहराई ,और चेहरे पर एक अजीब सी गंभीरता। उसकी उम्र के बाकी लड़के जहां खेलते - कूदते थे, वही अमन अक्सर चुपचाप बैठकर सोचता रहता था। उसकी मां उसे अक्सर देखी और सोचती ।"इतनी छोटी उम्र में यह इतना क्यों सोचता है ?"उसके पिता रामलाल एक मजदूर थे।रोज सुबह जल्दी उठते, खेती या निर्माण स्थल पर काम करते और शाम को थके -हरे घर लौटते।उसकी कमाई इतनी नहीं थी कि घर आराम से चल सके। कई बार तो घर में सिर्फ एक वक्त का खाना बनता था।एक दिन सुबह-सुबह अमन अपनी मां के पास बैठा था।और उसने धीरे से पूछा ।"मां,क्या हम कभी अच्छे घर में रहेंग?"मां ने मुस्कुराने की, कोशिश की लेकिन उसकी आंखों में छपी दर्द साफ देख रहा था। "जरूर रहेंगे बेटा ....जब तू बड़ा आदमी बनेगा।" यह बात अमन के दिल की गहराई तक उतर गई ।"अमन एक अलग सोच वाला लड़का था"। अमन बाकी बच्चों से अलग था। उसे खेलना अच्छा लगता था,लेकिन वह अपना समय बेकार नहीं करना चाहता था। वह अक्सर स्कूल के बाद पेड़ के नीचे बैठकर किताबें पढ़ता था ।कभी-कभी तो आसमान को देख कर सोचता।" क्या मेरी जिंदगी भी कभी बदल सकती है?" गांव के बच्चे उसका मजाक उड़ाते !देखो, ये हमेशा पढ़ता रहता है।" "अरे इससे क्या होगा?"लेकिन अमन को अब इन बातों से फर्क पड़ना बंद हो गया था। उसे पता था अगर उसे अपनी जिंदगी बदलनी है तो उसे अलग रास्ता चुनना होगा अमन की स्कूल की सच्चाई अमन का स्कूल साधारण था टूटी बैंक पुराने किताबें और कभी-कभी तो शिक्षक भी नहीं आते थे लेकिन एक शिक्षक थे शर्मा सर वह अमन को ध्यान से देखते थे एक दिन उन्होंने उसे बुलाया और पूछा तुम इतने ध्यान से पढ़ाई क्यों करते हो अमन ने बिना सोचे जवाब दिया सर क्योंकि मेरे पास और कोई रास्ता नहीं है शर्मा सर उच्च बोल के लिए चुप हो गए फिर उन्होंने कहा तुम बहुत आगे जाओगे बस हर मत मानना यह पहली बार था जब किसी ने अमन पर विश्वास किया था अमन को पड़ा पहला झटका एक दिन अमन स्कूल शेखर लोड लौटा तो देखा उसे उसके पिता जमीन पर बैठे थे और उसकी तबीयत ठीक नहीं थी मन परेशान थी डॉक्टर को दिखाने के पैसे नहीं थे उसे दिन अमन ने पहली बार खुद को बहुत कमजोरी महसूस किया उसने सोचा अगर मेरे पास पैसे होते तो मैं अपने पिता का इलाज करवा सकता था उसने एक फैसला किया अब वह सिर्फ पढ़ाई नहीं बल्कि काम आएगा भी अब अमन के सर आई जिम्मेदारियां का बोझ अगला दिन से ही अमन ने काम ढूंढना शुरू किया उसे एक चाय की दुकान पर काम मिल गया सुबह-सुबह स्कूल दोपहर कम और रात को पढ़ाई उसकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई कई बार वह इतना थक जाता की किताब खोलते ही सो जाता लेकिन फिर भी वह हार नहीं मानता था अब आया अमन की जिंदगी में मुश्किलों का दौरा बरसात का मौसम आया काम काम हो गया पैसे और भी काम आने लगे घर क्या हालत खराब होती जा रही थी एक दिन अमन की मां ने कहा बेटा पढ़ाई छोड़ दे पहले घर संभालते हैं यह सुनकर अमन का दिल टूट गया लेकिन उसने शांत होकर कहा मैन अगर अभी पढ़ाई छोड़ दी तो हम हमेशा ऐसे ही रहेंगे उसकी बात में सच्चाई थी अमन के अंदर आज थी उसे दिन के बाद अमन और भी ज्यादा मेहनत करने लगा अब उसके अंदर सिर्फ एक ही चीज जी कुछ बनाकर दिखाने की आप वह खुद से कहता है एक दिन सब बदल जाएगा बस अभी मेहनत करनी है छोटी-छोटी जीत धीरे-धीरे उसकी मेहनत लाने लगी स्कूल में उसके नंबर अच्छे आने लगे शर्मा सर ने उसकी मदद करने शुरू की उन्होंने उसे एक्स्ट्रा किताबें दी और पढ़ाई में गाइड किया अब अमन पहले से ज्यादा आत्मविश्वासी हो गया था अमन का बड़ा फैसला एक रात वह छत पर लेटा हुआ आसमान देख रहा था तारों को देखकर उसने खुद से कहा मैं भी एक दिन इन तारों की तरह छोडूंगा यह सिर्फ एक सपना नहीं था यह उसका वादा था अचानक आया बदलाव एक दिन स्कूल में खबर आई जिले में एक बड़ी परीक्षा होने वाली है जिसमें जीतने वाले छात्रों को शहर में पढ़ने का मौका मिलेगा अमन के दिल की धड़कन तेज हो गई यह मेरा मौका है लेकिन साथ ही डर भी था क्या मैं कर पाऊंगा अमन की खुद से लड़ाई उसे रात अमन सो नहीं पाया उसने मन में दो सवाल चल रहे थे एक रहती तू नहीं कर पाएगा दूसरे कहते अगर कोशिश नहीं करेगा तो कभी नहीं जान पाएगा अंत में उसने फैसला किया मैं कोशिश करूंगा चाहे कुछ भी हो जाए पार्ट वन का संदेश यही था कि जिंदगी में सबसे बड़ा दुश्मन बाहर नहीं अंदर होता है अगर आप खुद पर विश्वास कर ले तो आधी जीत वही हो जाती है मुश्किल आपको रोकने नहीं मजबूत बनाने आती है आगे क्या होगा क्या अमन उसे परीक्षा को पास कर पाएगा क्या उसकी जिंदगी सच में बदलने वाली है और जानने के लिए देखिए पार्ट 2
