Ficool

rupkothar golpo horror

WASIM_MOLLA
7
chs / week
The average realized release rate over the past 30 days is 7 chs / week.
--
NOT RATINGS
47
Views
Table of contents
VIEW MORE

Chapter 1 - horror story

काली हवेली का रहस्य

रात के ठीक 12 बजे, पश्चिम बंगाल के एक छोटे से गाँव "शिवतला" में अचानक तेज़ हवा चलने लगी। आसमान में बादल ऐसे गरज रहे थे जैसे कोई अदृश्य शक्ति अपना क्रोध दिखा रही हो। गाँव के बाहर, एक पुरानी और सुनसान हवेली खड़ी थी — जिसे लोग "काली हवेली" कहते थे।

कहते हैं, उस हवेली में कभी एक अमीर ज़मींदार, राजवीर सिंह, रहता था। उसकी पत्नी मीरा बहुत सुंदर और दयालु थी, लेकिन उसकी अचानक और रहस्यमयी मौत के बाद हवेली में अजीब घटनाएँ होने लगीं। कुछ लोग कहते थे कि मीरा की आत्मा अब भी वहाँ भटकती है।

पहला अध्याय: चुनौती

गाँव के चार दोस्त — आर्यन, समीर, राहुल और इमरान — कॉलेज की छुट्टियों में गाँव आए हुए थे। वे शहर में पढ़ते थे और भूत-प्रेत की कहानियों को मज़ाक समझते थे।

एक दिन चाय की दुकान पर बैठकर वे हवेली की बात सुन रहे थे।

"कोई भी वहाँ रात नहीं बिता सकता," चायवाले काका बोले, "जो भी गया, वो या तो पागल होकर लौटा, या फिर कभी वापस नहीं आया।"

आर्यन हँस पड़ा, "काका, ये सब अंधविश्वास है। हम आज रात वहीं रुकेंगे।"

गाँव वालों ने उन्हें बहुत समझाया, लेकिन चारों ने ठान लिया।

दूसरा अध्याय: हवेली के अंदर

रात 10 बजे, हाथ में टॉर्च लेकर वे हवेली पहुँचे। हवेली का बड़ा सा लोहे का गेट खुद-ब-खुद "क्रीईक…" की आवाज़ के साथ खुल गया।

"ये तो हवा की वजह से होगा," समीर ने खुद को दिलासा दिया।

अंदर कदम रखते ही ठंडी हवा ने उन्हें घेर लिया। दीवारों पर पुराने चित्र लगे थे, जिनकी आँखें जैसे उनका पीछा कर रही थीं।

अचानक, ऊपर की मंज़िल से पायल की हल्की आवाज़ आई।

छन… छन… छन…

"तुम लोगों ने सुना?" राहुल की आवाज़ काँप रही थी।

"शायद कोई जानवर होगा," इमरान बोला, लेकिन उसकी आँखों में डर साफ दिख रहा था।

वे धीरे-धीरे सीढ़ियाँ चढ़ने लगे। हर कदम पर लकड़ी की सीढ़ियाँ कराह रही थीं।

ऊपर पहुँचते ही एक कमरा खुद-ब-खुद खुल गया।

दरवाज़े के पीछे एक पुराना आईना था। जैसे ही आर्यन ने टॉर्च की रोशनी उस पर डाली, उसमें चारों की जगह पाँच परछाइयाँ दिख रही थीं।

"ये… ये कैसे?" समीर चीख पड़ा।

पाँचवीं परछाईं धीरे-धीरे उनके पीछे खड़ी हो गई।

तीसरा अध्याय: सच्चाई

धीरे-धीरे हवा और ठंडी होती गई। कमरे का दरवाज़ा अपने आप बंद हो गया।

अचानक आईने में एक औरत का चेहरा उभरा — सफेद साड़ी, बिखरे बाल, और खून से भरी आँखें।

"तुम यहाँ क्यों आए हो…?" उसकी आवाज़ पूरे कमरे में गूँज उठी।

आर्यन हिम्मत जुटाकर बोला, "हम सच्चाई जानना चाहते हैं।"

औरत की आँखों से आँसू बहने लगे — जो खून में बदल गए।

"मुझे मेरे ही पति ने मार डाला… इसी कमरे में… क्योंकि उसे मेरी दौलत चाहिए थी। मेरी आत्मा तब तक मुक्त नहीं होगी, जब तक सच सामने नहीं आएगा।"

तभी अचानक दीवार पर एक पुरानी तस्वीर गिर पड़ी। तस्वीर के पीछे एक डायरी छुपी थी।

इमरान ने काँपते हाथों से डायरी उठाई। उसमें राजवीर के लिखे शब्द थे — उसने अपनी पत्नी की हत्या कबूल की थी।

अचानक नीचे से किसी के चलने की आवाज़ आई।

ठक… ठक… ठक…

"वो… वो कौन है?" राहुल फुसफुसाया।

सीढ़ियों पर एक बूढ़ा आदमी दिखाई दिया — झुकी हुई कमर, हाथ में लालटेन।

"तुम लोगों को यहाँ नहीं आना चाहिए था," उसने कहा।

"आप कौन हैं?" आर्यन ने पूछा।

"मैं इस हवेली का रखवाला हूँ… और राजवीर सिंह का बेटा।"

उसकी आँखें अचानक लाल हो गईं।

"मेरे पिता की सच्चाई कोई बाहर नहीं ले जा सकता!"

चौथा अध्याय: भागने की कोशिश

कमरे की खिड़कियाँ बंद हो गईं। हवेली में चीखें गूँजने लगीं।

मीरा की आत्मा फिर प्रकट हुई।

"सच को दबाया नहीं जा सकता…"

बूढ़ा आदमी अचानक जमीन से ऊपर उठ गया, जैसे कोई अदृश्य शक्ति उसे पकड़ रही हो।

"नहींईईई!" उसकी चीख पूरे हवेली में गूँज उठी।

डायरी अचानक आग पकड़ने लगी। आर्यन ने तुरंत उसे खिड़की से बाहर फेंक दिया, जहाँ बारिश हो रही थी।

बिजली कड़की — और पूरा कमरा रोशनी से भर गया।

जब रोशनी गई, तो सब शांत था।

बूढ़ा आदमी गायब था।

आईना टूट चुका था।

और पायल की आवाज़ बंद हो चुकी थी।

अंतिम अध्याय: अगली सुबह

सुबह गाँव वालों ने देखा कि हवेली का बड़ा दरवाज़ा खुला है।

चारों दोस्त बाहर बैठे थे — डरे हुए, लेकिन ज़िंदा।

"हमने सब देख लिया," आर्यन ने कहा।

उन्होंने डायरी गाँव वालों को दी।

सच्चाई सामने आई। पुलिस ने पुराने रिकॉर्ड खंगाले — और राजवीर सिंह के अपराध की पुष्टि हुई।

उस दिन के बाद हवेली में कभी कोई अजीब घटना नहीं हुई।

लेकिन…

कुछ लोग कहते हैं कि अमावस्या की रात, जब हवा तेज़ चलती है, तो हवेली की टूटी खिड़की से अब भी पायल की बहुत हल्की आवाज़ सुनाई देती है।

छन… छन… छन…

और अगर कोई ध्यान से देखे…

तो हवेली की छत पर सफेद साड़ी में एक परछाईं खड़ी दिखाई देती है।

क्या वो सच में मुक्त हो गई थी…

या अब भी किसी का इंतज़ार कर रही है?

समाप्त… या शायद नहीं।