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Chapter 1 - " Life story for raj Gupta "

यह कहानी है राज गुप्ता की जो राजस्थान राज्य के पास एक छोटे से जिले मे रहता था । जहां अक्षर संसाधनो के अभाव में बिजली बहुत कम मतबलब की नाम मात्र आती थी पर राज पढ़ने में बहुत अच्छा था वह रोजाना अपने गांव से 4 किलोमीटर दुर पड़ने जाता था। और उसका थका हारा स्कूल जाना एक नियम बन गया था उसके मन मे एक ही आशा थी । कि वह बड़ा होके कुछ बनेगा । धीरे धीरे समय बीतता गया और राज गुप्ता की उम्र 18 वर्ष हो गई ओर उसने अपनी क्लास 12th पास के ली थी । ओर उसे आगे की पढ़ाई के लिए शहर जाना था ।पर पैसों की आर्थिक कमी के कारण उसे उसके माता - पिता राज को घर से बाहर भेजने में असफल थे। राज अपनी गरीब के कारण अपने मन में बहुत रोता था । उसका सपना था कि वह एक दिन यूपीएससी पास करके अपने गांव को अच्छे स्तर पर ले जाएगा और वह गांव में कॉलेज ओर अच्छी स्कूल खोलेगा और साथ साथ वह पूरे जिले कि गरीबी को मिटाना चाहता था । राज गुप्ता के मन में एक ही सवाल था कि वह गरीब घर में जन्मा है।

पर वह किसी भी गरीब बच्चे को शिक्षा के बिना रहने नहीं देगा पर राज गुप्ता के साथ स्थिति थोड़ी खराब थीं और वह बिना कोचीन संस्थान के अपने गांव में ही पड़ता था। तभी उसकी जिंदगी में एक बहुत बड़ा मोड़ आया। एक दिन राज गुप्ता के पिता केअचानक दिल के दौरे से उसके पिता को मृत्यु को स्वीकार होना पड़ा।

अब राज गुप्ता के परिवार की स्थिति और भी खराब हो गई ओर घर में कमाने वाला कोई नहीं था और वह घर का बड़ा बेटा होने के कारण उसका फर्ज था कि वह घर खर्च चलाए क्योंकि घर में उससे छोटी दो बहने और एक भाई था तो मजबूरने उसे कमाने के लिए घर से बाहर जाना पड़ा ओर उसे कमाते कमाते एक साल से ज्यादा हो गया था।

और राज गुप्ता को इस उम्र में कमाने के कारण उसकी पढ़ाई पर गहरा असर पड़ा तब भी उसे टाइम मिलता तो वह 2_4 घंटे पढ़ लेता था राज गुप्ता ने अपनी पढ़ाई ज़ारी रखी। राज गुप्ता अपना घर खर्च निकाल कर हर महीने एक- दो हज़ार की सेविंग कर रहा था। ताकि वह यूपीएससी के नोट्स खरीद सके । तभी एक दिन राज की मुलाकात एक ऐसे सज्जन से होती है जिसने राज के जीवन को एक दिशा दिलाई।

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