Ficool

Chapter 1 - Unnamed

तब मुझे एहसास हुआ कि मैं कितनी बड़ी गलती कर दी है ऐसी गलती कभी नहीं करनी चाहिए जब मेरी बेटी हुई तब घर में भी कुछ इज्जत बनी और सब लोग मुझे थोड़ा प्यार करने लगे पर हमारे घर में मेरा छोटा वाला देवर बहुत खतरनाक था वह हर बात पर ताना मारता रहता था उसकेतानेे से मैं तंग आ गई थी और मैं अपने मम्मी पापा को भी बोला था कि मेरा देवर बहुत ताने मार रहा है हर बात पर उसके ताने सुनने पड़ते हैं मैंने अपनी सास ससुर को भी बोला था समझाओ इसको है क्या यह ऐसा हर बात पर ताने मारना जरूरी नहीं होता इंसान हूं मैं भी मुझे भी दर्द होता है पर वह अपनी जिद पर अड़ा रहा उसने हमारे को अलग करने की साजिश राजा ही डालें वह चाहता था कि यह लग रहे और उसने दो-तीन बारी बोला भी था अगर तुम्हारे में इतनी अक्ल है तो खुद अलग रह कर दिखा उल्टे उल्टे तो काम करने पहले मायके में प्रेग्नेंट रहना फिर है ससुराल में अपना रू बजाना बहुत खतरनाक लड़का था वह एक दिन मेरे सास ससुर ने बोल ही दिया तुम लोग अपना खाना अलग बनाओ रोज-रोज का लड़ाई झगड़ा घर में ठीक नहीं होता है जैसे कि मैं ही लड़ाई करती थी मेरे पति ने बोल दिया ठीक है मम्मी हम अलग ही खाना बना लेते हैं उसके बाद हम अलग रहने लगे जिस दिन हमारे को अलग निकला उसे दिन हमें कुछ भी घर से नहीं दिया गया हमारे पास सिर्फ ₹500 थे 500 का क्या ही आना था थोड़ा जैसा राशन लाया और उसी में ही गुजारा कर लिया धीरे-धीरे मेरे पति कम पर जाने लगे और हमारी आर्थिक स्थिति सुधरने लगी तब हमने थोड़ा-थोड़ा करके सामान लेना शुरू कर दिया थोड़ा मेरे मम्मी पापा ने दिया था इस तरह से हमारा घर चल रहा था कभी-कभी ऐसी स्थिति आती थी हमारे पास डिपू का सामान निकालने के लिए तक पैसे नहीं होते थे मैं बॉर्डर बनती थी और थोड़ा सूट वगैरा शीला लेती थी लोगों के तब जाकर मिलजुल कर हम घर चलाने लगे फिर मैंने एक दिन फैसला किया हमें घर भी बनाना होगा जा हम रहते थे वहां पर बहुत पानी निकल रहा था नीचे से और हमारे कपड़े तक खराब हो रहे थे बिस्तर के नीचे ऐसे बारीक बारीक कीड़े निकलते थे हमारे को एक ही कमरा दिया गया था वहीं पर खाओ वहीं पर सो जाओ वह भी ना वहां पर खिड़की थी और नीचे से सेद नीकलता था इसी तरह हमारी जिंदगी चल रही थी वह दिन को कम पर जाते थे और मैं और मेरा बेटा और बेटी घर में होते थे बेटे को हमने नानी के घर से वापस लाया था और उसे स्कूल में दाखिल कर दिया था वह दिन में दिन को स्कूल जाता था उसके पापा कम पर जाते थे मैं घर में लोगों के सूट सिलने थी और कुलवी पटी बनती थी बहुत मुश्किल हो गया था घर चलना भी धीरे-धीरे हमने खुद ही पत्थर निकले और फिर घर बनाने की तैयारी करने लगे वह दिन में काम पर जाते थे 5:00 के बाद अपना काम करते थे जैसे पत्थर निकालना घर के जहां पर मकान बना रहे थे वहां पर नीचे सफाई करना इसी तरह दिन गुजरते गए वह मिस्त्री का काम खुद ही करते थे फिर हमने थोड़ा-थोड़ा करके घर के लिए मटेरियल लाया जैसे रेत रेत बजरी सीमेंट सरिया धीरे-धीरे करके हमने सारा सामान लाया 5 महीने में हमने पूरे घर का सामान लाया और फिर काम शुरू कर दिया फिर मेरे ससुर भी आए हेल्प करने वह भी मिस्त्री का काम करते थे इसी तरह धीरे-धीरे हम लोगों ने घर बना दिया दो कमरे एक किचन टॉयलेट बाथरूम बड़ी मुश्किल से घर तो तैयार कर दिया तैयार तो क्या ऐसे जैसे पिलर डाल दिया ऊपर से स्लैब डाल दिया फिर वह फिर से कम पर चले गए और मैं घर का काम करती खेत में भी काम करती हूं फिर हमने खेत में टमाटर लगाने शुरू किया कुछ पैसे वहां से आए कुछ पैसे उन्होंने कमाए फिर हमने ब्लॉक खरीद के ले और सीमेंट की बोरी फिर चेन्नई का काम शुरू किया उसके बाद बचा था प्लास्टर का काम फिर धीरे-धीरे उसको भी सामान लाया रेत बजरी सीमेंट फिर प्लास्टर भी किया और फर्षभी डाल दिया इसी तरह हमारा घर तैयार हो गया फिर बचा था लकड़ी का काम उसके बाद लोगों से लकड़ी निकालने को दी उनको कुछ पैसे दिए फिर लकड़ी का मिस्त्री लगाया फिर खिड़की दरवाजे बनाए उसके बाद घर तो हो गया तैयार छोटा जैसा घर अब घर में बचा था रंग लगाने का काम फिर से कुछ पैसे कमाए फिर रंग लाया फिर रंग के लिए पेंटर को बुलाया फिर हो गया बिल्कुल तैयार घर रहने के लिए उसे दिन में इतनी खुश हो गई थी कि हमारे आज अपना घर हो गया

More Chapters