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Chapter 3 - chhalava aur Kali parchhai

. खंडित स्मृतियाँ

पार्क में हुए उस भयानक विस्फोट के बाद, जब धुआँ छँटा, तो मंज़र बदल चुका था। समीर ज़मीन पर पड़ा कराह रहा था। पुलिस की गाड़ियाँ और एम्बुलेंस के सायरन पूरे शहर में गूँज रहे थे। आर्यन का शरीर गायब था, जैसे वह कभी वहाँ था ही नहीं।

डॉक्टरों ने समीर को 'हिस्टीरिया' का मरीज़ घोषित कर दिया। लेकिन समीर की आँखों में जो सन्नाटा था, वह किसी सदमे का नहीं था। वह कुछ और ही था। जब पुलिस ने उससे पूछा कि उस रात क्या हुआ, तो उसने सिर्फ एक वाक्य कहा: "वह अब मेरे अंदर नहीं है, वह सबके अंदर है।"

पुलिस ने इसे बड़बड़ाहट समझा, लेकिन असली खौफ तो अभी शुरू होना था।

2. काली घाटी का शहरी विस्तार

अगले कुछ दिनों में शहर के अलग-अलग हिस्सों से अजीबोगरीब खबरें आने लगीं।

शहर के सबसे व्यस्त मॉल के आईने अचानक काले पड़ गए। जो भी उनमें देखता, उसे अपना चेहरा नहीं, बल्कि एक गलते हुए कंकाल का चेहरा दिखाई देता।

हॉस्पिटल के मुर्दाघर (Mortuary) से तीन लाशें गायब हो गईं, और सीसीटीवी फुटेज में वे लाशें खुद अपने पैरों पर चलकर बाहर जाती दिखीं।

सबसे डरावनी बात यह थी कि शहर के बच्चों ने 'सफेद औरत' (मृणालिनी) के बारे में बात करना शुरू कर दिया था, जो उन्हें सोते समय लोरियाँ सुनाती थी।

रहमत चाचा, जो अब एक गुप्त ठिकाने पर छिपे थे, समझ गए थे कि ठाकुर ने सिर्फ समीर को मोहरा नहीं बनाया था। उसने शहर की 'साझा चेतना' (Collective Consciousness) पर हमला किया था।

3. रूहानी जेल का सच

आर्यन मरा नहीं था। वह 'शून्य' (The Void) में था। यह वह जगह थी जहाँ ठाकुर अपनी उन रूहों को रखता था जिनका वह इस्तेमाल कर चुका था। आर्यन ने वहाँ देखा कि मृणालिनी अकेली नहीं थी। वहाँ सैकड़ों लोग थे—डॉक्टर, इंजीनियर, पुलिसवाले—जो पिछले कुछ सालों में शहर से रहस्यमयी ढंग से गायब हुए थे।

आर्यन ने महसूस किया कि 'शून्य' की दीवारें धीरे-धीरे पतली हो रही हैं। ठाकुर अब इस दुनिया और रूहों की दुनिया के बीच के पर्दे को पूरी तरह फाड़ना चाहता था।

मृणालिनी ने आर्यन का हाथ पकड़ा। उसके हाथ बर्फ जैसे ठंडे थे। "आर्यन, ठाकुर ने तुम्हें यहाँ सिर्फ कैद करने के लिए नहीं भेजा। तुम उसके लिए एक 'बैटरी' की तरह हो। तुम्हारी फोटोग्राफर वाली नज़र... वह उसका इस्तेमाल करके इस दुनिया को अपनी आँखों से देखना चाहता है।"

4. समीर का नया अवतार

समीर को अस्पताल से छुट्टी मिल गई। वह अपने फ्लैट पर वापस आया, लेकिन उसने बत्तियाँ नहीं जलाईं। वह अंधेरे में बैठा रहता। उसके घर के कोने-कोने से फुसफुसाहटें आती थीं।

एक रात, समीर का एक और दोस्त, कबीर, उससे मिलने आया। कबीर ने देखा कि समीर एक पुरानी पेंटिंग बना रहा था। वह पेंटिंग 'काली घाटी' की उस हवेली की थी।

"समीर, तुम ठीक तो हो भाई?" कबीर ने पूछा।

समीर ने मुड़कर देखा। उसके चेहरे पर एक ऐसी मुस्कान थी जो इंसानी नहीं लग रही थी। "मैं ठीक नहीं हूँ कबीर... मैं 'पूर्ण' हूँ। क्या तुम देखना चाहोगे?"

समीर ने कबीर की आँखों में देखा। कबीर की आँखों की पुतलियाँ अचानक फटने लगीं और उनमें से काले कीड़े निकलने लगे। कबीर चिल्लाना चाहता था, लेकिन उसका गला सूख चुका था। समीर ने धीरे से कहा, "अब तुम मेरे कैमरे हो। जाओ, और वह सब देखो जो मैं देखना चाहता हूँ।"

5. वो रहस्यमयी किताब: 'द ओरिजिन्स ऑफ डार्कनेस'

रहमत चाचा को पता चला कि ठाकुर गजेंद्र सिंह की शक्ति का स्रोत उस हवेली में नहीं, बल्कि एक प्राचीन किताब में था, जिसे 'अंधकार की वंशावली' कहा जाता था। वह किताब अब शहर के म्यूजियम के उस हिस्से में रखी थी जहाँ किसी को जाने की अनुमति नहीं थी।

सस्पेंस तब गहराया जब रहमत चाचा को पता चला कि उस किताब को म्यूजियम में लाने वाला कोई और नहीं, बल्कि आर्यन के पिता थे, जो सालों पहले एक रिसर्च ट्रिप पर गायब हो गए थे। क्या आर्यन का काली घाटी जाना कोई इत्तेफाक था? या उसे पैदा होने से पहले ही इस नरक का हिस्सा चुन लिया गया था?

6. चैप्टर का अंत: महा-सस्पेंस (The Cliffhanger)

आर्यन ने 'शून्य' के अंदर एक दरवाज़ा ढूँढ लिया। वह दरवाज़ा सीधे समीर के आईने में खुलता था। आर्यन ने पूरी ताकत लगाकर उस आईने के पार हाथ निकाला।

समीर अपने आईने के सामने खड़ा था। उसने आईने से निकलते हुए आर्यन के हाथ को देखा। उसने डरे बिना उस हाथ को पकड़ा और उसे बाहर खींच लिया।

लेकिन जैसे ही आर्यन बाहर आया, उसने देखा कि समीर के पीछे एक नहीं, बल्कि सात परछाइयाँ खड़ी थीं। और उन परछाइयों में से एक का चेहरा बिल्कुल आर्यन जैसा था।

समीर ने आर्यन के कान में कहा, "तुम्हें क्या लगा, तुम बाहर आ रहे हो? तुमने बस मुझे सात और दरवाज़े दे दिए हैं।"

तभी शहर के घंटाघर ने रात के 3 बजाए। अचानक शहर की हर खिड़की, हर आईना, और हर मोबाइल स्क्रीन एक साथ फटी। हज़ारों रूहें एक साथ शहर की सड़कों पर उतर आईं।

सस्पेंस ट्विस्ट:

आर्यन ने महसूस किया कि उसके शरीर के अंदर अब मृणालिनी नहीं, बल्कि खुद ठाकुर गजेंद्र सिंह की 'मूल आत्मा' प्रवेश कर चुकी है। समीर अब सिर्फ एक नौकर था, और असली शैतान अब आर्यन के रूप में आज़ाद हो चुका था।

लेकिन असली झटका अभी बाकी था... रहमत चाचा ने जब वह पुरानी किताब खोली, तो उसके आखिरी पन्ने पर एक तस्वीर थी। वह तस्वीर आर्यन, समीर और कबीर की थी, जो 1924 में ठाकुर के साथ खड़े होकर मुस्कुरा रहे थे।

क्या ये तीनों 100 साल पहले भी वहीं थे? क्या यह समय का कोई दुष्चक्र (Time Loop) है?

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